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एक से सवा लाख जगाओ । HINDI SHORT FILM | RISHI PRASAD

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एक से सवा लाख जगाओ । HINDI SHORT FILM | RISHI PRASAD https://youtu.be/rL0ETK2zfao via @YouTube A short film. Everyone must watch till the end. Hari Om. For getting a copy of Rishi Prasad download the Rishi Prasad App from Google Playstore or visit http://rishiprasad.org

अजा एकादशी Aja Ekadashi

🙏🏻जय गुरूजी 🙏🏻Today 28.08.2016 is Aja Ekadashi. Aja Ekadashi Vrat Katha and Mahatmya👆🏻. Those who listen to this story get blessings equivalent to 1 Aswamedh Ygna. Please don't eat rice on this day. आज 28.08.2016 को अजा एकादशी है। अजा एकादशी व्रत कथा व महात्म्य 👆🏻। यह सुनने मात्र से एक अश्वमेध यज्ञ का फल होता है। एकादशी के दिन चा...

Devshayani Ekadashi

15 June 2016 is Devshayani Ekadashi Ekadashi Tithi Begins = 00:14am on 15/Jul/2016 Ekadashi Tithi Ends = 02:08am on 16/Jul/2016 On 16th, Parana Time = 08:29 to 08:50 On Parana Day Hari Vasara End Moment = 08:29 The fasting time is Sunrise on15/Jul/2016 to 8.29am on 16/Jul/2016 The Ashadha Shukla Paksha Ekadashi, according to Hindu calender, is known as Devshayani Ekadashi or Padma Ekadashi or Ashadi Ekadashi or Hari Shayani Ekadashi. Lord Vishnu goes to sleep on this day and wakes up after four months on Prabodhini Ekadashi, also known as Devuthani ekadashi or Devutthan ekadashi. Devshayani Ekadashi comes just after famous Jagannath Rathyatra and normally falls in June end or early July as per English calendar.  A holy period of four months - Chaturmas - in Hindu calendar, starts from this day. Parana means breaking the fast. Ekadashi Parana is done after sunrise on next day of Ekadashi fast. It is necessary to do Parana within Dwadashi Tithi unless Dwadashi is over before ...

परमा एकादशी

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अर्जुन बोले :  हे जनार्दन ! आप अधिक (लौंद/मल/पुरुषोत्तम) मास के कृष्णपक्ष की एकादशी का नाम तथा उसके व्रत की विधि बतलाइये । इसमें किस देवता की पूजा की जाती है तथा इसके व्रत से क्या फल मिलता है ? श्रीकृष्ण बोले :  हे पार्थ ! इस एकादशी का नाम  ‘ परमा ’  है । इसके व्रत से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं तथा मनुष्य को इस लोक में सुख तथा परलोक में मुक्ति मिलती है । भगवान विष्णु की धूप ,  दीप ,  नैवेध ,  पुष्प आदि से पूजा करनी चाहिए । महर्षियों के साथ इस एकादशी की जो मनोहर कथा काम्पिल्य नगरी में हुई थी ,  कहता हूँ । ध्यानपूर्वक सुनो : काम्पिल्य नगरी में सुमेधा नाम का अत्यंत धर्मात्मा ब्राह्मण रहता था । उसकी स्त्री अत्यन्त पवित्र तथा पतिव्रता थी । पूर्व के किसी पाप के कारण यह दम्पति अत्यन्त दरिद्र था । उस ब्राह्मण की पत्नी अपने पति की सेवा करती रहती थी तथा अतिथि को अन्न देकर स्वयं भूखी रह जाती थी । एक दिन सुमेधा अपनी पत्नी से बोला:  ‘ हे प्रिये ! गृहस्थी धन के बिना नहीं चलती इसलिए मैं परदेश जाकर कुछ उद्योग करुँगा । ’ उसकी पत्नी बोली...

Rules for keeping Ekadashi:

Ekadashi is the 11th day of Lunar calender month in the Hindu calender system. This is a day for fasting or Upvaas .  Pujya Bapuji says that "Upvaas" means Up - Vaas i.e., to stay close to God.  Upvaas  involves fasting while observing certain rules.   The purpose of fasting is to experience peace & bliss. Eating less enables the mind & body to function more effectively.  Ekadashi days are very important & beneficial days for all householders. The rules for keeping fast/ upvaas on this day are:  1) One should not eat any cereals ("Ann" in hindi) like rice, pulses, wheat etc. & salt. 2) If possible, one should stay on water. Drinking Luke warm water or lemon-mishri (crystallized sugar) water is very good as it cleanses the hidden undigested food in the body.  3) If one feels hungry, then one can take milk or fruit. Fruit should not be eaten with milk (therefore no strawberry shake, mango shake, chickoo shake etc.). One should not ea...

वास्तविक उन्नति

(परमपूज्य बापूजी की अमृतवाणी) वास्तविक उन्नति अपने आत्मा-परमात्मा के ज्ञान से, आत्मा-परमात्मा की प्रीति से, आत्मा-परमात्मा में विश्रांति पाने से होती है | जिसने सत्संग के द्वारा परमात्मा में आराम करना सीखा, उसे ही वास्तव में आराम मिलता है, बाकी तो कहाँ हैं आराम ? साँप बनने में भी आराम नहीं, भैंस बनने में भी आराम नहीं है, कुत्ता या कलंदर बनने में भी आराम नहीं, आराम तो अंतर्यामी राम का पता बताने वाले संतों के सत्संग में, ध्यान में, योग में | वहाँ जो आराम मिलता है, वह स्वर्ग में भी कहाँ है ! संत तुलसीदास जी कहते हैं: तात स्वर्ग अपबर्ग सुख धरिय तुला एक अंग | तूल न ताहि सकल मिलि जो सुख लव सतसंग ||                                              (श्री रामचरितमानस सुन्दर कांड : ४) सत्संग की बड़ी भरी महिमा है, बलिहारी है | .... ........ आगे पढने के लिए 'ऋ...

कर्म व विचार भी पैदा करते हैं दिव्य तरंगें

कर्म व विचार भी पैदा करते हैं दिव्य तरंगें कर्म व विचार भी पैदा करते हैं दिव्य तरंगें (पूज्य बापूजी की पावन अमृतवाणी) कानपुर में एक बाई हो गयी, वृद्ध थी। स्वामी राम (जिनका देहरादून में आश्रम है) के गुरु की वह शिष्या थी। उसको गुरु का ज्ञान मिल गया था। उसका बेटा मशहूर डॉक्टर था – डॉ ए. एन. टंडन। उसने अपने पुत्र को बुलाया और बोलीः "अपने परिवार को बुलाओ, अब मैं संसार से जा रही हूँ। तुम रोना पीटना नहीं। जो जानना था वह मैंने गुरुकृपा से जान लिया है। मेरी मौत नहीं होती, शरीर बदलता है। पाँच भूतों से शरीर बना है, पाँच भूतों में मिल जायेगा। मिट्टी से घड़ा बना है और मिट्टी में मिल जायेगा, आकाश महाकाश से मिल जायेगा, ऐसे ही आत्मा परमात्मा से मिल जायेगा। तुम रोना-धोना नहीं। गुरु की कृपा से मेरी मोह-ममता मिट गयी है।" टंडनः "माँ ! तुम क्या कह रही हो ? तुम कैसे जाओगी ! हमारा रहेगा कौन ?" फिर तो माँ हँसने लगीः "बेटे ! तू अब से रो के, ʹमाँ-माँʹ करके मेरे को फँसा नहीं सकता। यह सब धोखा है। ʹयह मेरी माँ है, यह मेरा बेटा...ʹ यह सदा टिकता नहीं और...

हरि व्यापक सर्वत्र समानाः.....

हरि व्यापक सर्वत्र समानाः..... (पूज्य बापू जी की ज्ञानमयी अमृतवाणी) गुजरात में नारायण प्रसाद नाम के एक वकील रहते थे। वकील होने के बावजूद भी उन्हें भगवान की भक्ति अच्छी लगती थी। नदी में स्नान करके गायत्री मंत्र का जप करते, फिर कोर्ट कचहरी का काम करते। कोर्ट-कचहरी में जाकर खड़े हो जाते तो कैसा भी केस हो, निर्दोष व्यक्ति को तो हँसते-हँसते छुड़ा देते थे, उनकी बुद्धि ऐसी विलक्षण थी। एक बार एक आदमी को किसी ने झूठे आरोप में फँसा दिया था। निचली कोर्ट ने उसको मृत्युदंड की सजा सुना दी। अब वह केस नारायण प्रसाद के पास आया। ये भाई तो नदी पर स्नान करने गये और स्नान कर वहीं गायत्री मंत्र का जप करने बैठ गये। जप करते-करते ध्यानस्थ हो गये। ध्यान से उठे तो ऐसा लगा कि शाम के पाँच बज गये। ध्यान से उठे तो सोचा कि ʹ आज तो महत्त्वपूर्ण केस था। मृत्युदंड मिल हुए अपराधी का आज आखिरी फैसले का दिन था। पैरवी करके आखिरी फैसला करना था। यह क्या हो गया ! ʹ जल्दी-जल्दी घर पहुँचे। देखा तो उनके मुवक्किल के परिवार वाले भी बधाई दे रहे हैं, दूसरे वकील भी बधाई देने आये हैं। उनका अपना सहायक ...